पर्यटन विकास की ओर अग्रसर “बाँदा”
सुशील कुमार यादव1] डॉ0 आरती पाण्डेय2
1असि0 प्रोफेसर-इतिहास एवं शोधार्थी, बी0यू0, झाँसी राजकीय महाविद्यालय पिपरहरी तिन्दवारी, बाँदा
2एसो0 प्रो0 – इतिहास पं0 जे0एन0 कॉलेज, बाँदा
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
बाँदा भूगोल बाँदा उ0प्र0 के दक्षिण में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत यमुना नदी के दक्षिण में केन नदी के किनारे 24.53 0 से 25.550 उत्तरी अक्षाँश एवं 80.870 से 81.530 पूर्वी देशान्तर के बीच में स्थित है । बाम देव ऋषि आश्रम, बामदेवेश्वर महादेव मन्दिर, कालिन्जर किला, नवाब टैंक, केन नदी घाट और उसमें पाया जाने वाला “शजर पत्थर” भूरा गढ़ किला, महावीरन मंदिर, महेश्वरी देवी मन्दिर और गिरवा देवी मन्दिर आदि के कारण बाँदा जनपद का पुरातत्व एवं इतिहास अत्यन्त सम्पन्न माना जाता है । प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से सम्पन्न बाँदा में पर्यटन की अपार संभावनाये हैं । इन्ही संभावनाओं को बाँदा जनपद के यशस्वी जिला अधिकारी एम्बिशन मैन श्री हीरा लाल जी नें दिल से महसूस किया है । इनकी खासियत है, कि ये जिले में अपने अभिनव प्रयोगों और प्रयासों से सदैव सुर्खियों में बने रहते हैं । इनके कार्यक्रम स्थानीय सांस्कृतिक विशेषताओं जैसे नृत्य, गान, हस्तकौशल को समाहित करते हुए जन सहभागिता से सम्बन्धित होते हैं और बजट लेस होते हैं । माननीय जिलाधिकारी जी ने बाँदा के कालिन्जर किला और नवाब टैंक को विश्व पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने का दृढ संकल्प लिया है । इस दिशा में सुनयोजित ढंग से बाँदा में अनेक कार्य हो रहे हैं ।
बाम देव महेश्वर मंन्दिर माहेश्वरी देवी मन्दिर
KEYWORDS:
izLrkouk
पर्यटन का महत्व –
पर्यटन आज दुनिया का प्रमुख उद्योग बन चुका है । कई देशों की अर्थव्यवस्था तो पर्यटन पर ही निर्भर है । पहाड़, नदियाँ, तालाब, किले, मन्दिर, इमारतें देख कर लोग मनोरंजित होते हैं । बाँदा आकर लोग प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से तृप्ति पा सकते हैं । बड़ी नेमतों से मिली है यह जिन्दगी, हम चाहेंगें कि लोग बाँदा आयें और यहां के इतिहास को महसूस करें । इतिहास हमेशा अतीत का आइना दिखाकर भविष्य का निर्माण करना सिखाता है । यह कब, क्यों और कैसे बना इसकी रोचक कहानी पता चलती है । व्यक्ति अपने में एक नया जोश और नवजीवन पाता है ।
पर्यटन मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को अनुभव करने का सबसे अच्छा साधन होता है । आदि काल से ही मानव घुमन्तू रहा है तभी नयी- 2 चीजों का अविष्कार कर पाया और नयी -2 सभ्यताओं एवं संस्कृतियों का निर्माण हुआ । पर्यटन का महत्व बहुत है किन्तु इसके विकास हेतु एक सुनियोजित नीति होनी चाहिए । इसीलिए जिलाधिकारी महोदय अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहते हैं कि पर्यटन विकास की ओर बाँदा तभी अग्रसर होगा जब हम यह सुनिश्ति करें कि आने वाला पर्यटक भौतिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक रूप से संन्तुष्ट हो । उनके निर्देशन में पर्यटन विकास के प्रमुख क्षेत्र स्वागत, सूचना, सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, स्थानीय उत्पाद बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम आदि के प्रति जागरूकता अभियान चलाये जा रहें हैं।
जिलाधिकारी महोदय जी ने कालिंन्जर एवं नवाब टैंक को विशेष आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के कार्यक्रम लगातार जारी रखे हैं । जिले में हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों जैसे इन्नोवेशन एण्ड स्टार्टअप सम्मिट 2019 , 90 + मतदान, जल संरक्षण कुओं, तालाब जिलाओं और दीपदान, कैरियर एडवांसमेंट प्रोग्राम, वन-डे इक्सपोजर विजिट (एक दिन का अधिकारी कार्यक्रम) आदि के कारण बाँदा पूरे देश में चर्चित हो रहा है और अपनी विशेष पहचान बना रहा है जिससे लोग बाँदा के प्रति आकर्षित हों किन्तु समस्या यह है कि बाँदा को पर्यटन विकास की ओर कैसे अग्रसर किया जाये ?
समाधान है माननीय जिलाधिकारी श्री हीरा लाल जी द्वारा किये जा रहे निरन्तर प्रयास ।
जानकारी के माध्यम हैं कु0 वंदिता श्रीवास्तव, उपजिलाधिकारी नरैनी और श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय, अधिशाषी अभियन्ता केन कैनाल बाँदा तथा स्वयं द्वारा कालिंजर एवं नवाब टैंक का किया गया भ्रमण और प्रो0 देवाशीष दास गुप्ता आई0 आई0 एम0 लखनऊ, कान्सल्टैन्ट बाँदा टूरिज्म ।
आकर्षक पर्यटन केन्द्र के रूप में कालिंजर का विकास –
कालिंजर मध्य कालीन भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली किला है । यह 900 फीट ऊँचाई पर पहाड़ी में महातीर्थ है । वेंदो में इसे तपस्या स्थान बताया गया है । कूर्म पुराण में इसे शिव का घर कहा गया है ।
कालिन्जर किला
पद्मा पुराण के अनुसार इसे उत्तर भारत के 9 पवित्र स्थानों में गिना जाता है । ऐतिहासिक दृष्टि से चंदेलों की सैनिक राजधानी कालिंजर थी । यहाँ के नीलकंठेश्वर मंन्दिर में संगीत व नृत्य के सार्वजनिक उत्सव होते थे । मन्दिर शिलालेख में महानचनी महादेवी पद्मावती का उल्लेख है । महाभारत में कालिंन्जर पर्वत को हिरण्य बिन्दु नाम से परम सम्पूज्य कहा गया है । मत्य पुराण में इसे महाकालेश्वर, उज्जैन के समान अविमुक्त क्षेत्र माना गया है । वायु पुराण में कालिन्जर को पवित्रतम श्राद्द तीर्थ कहा गया है । इलियट डाउसन द्वारा सम्पादित “भारत का इतिहास” लेख में कहा गया है कि पहली सदी ई0 में केदार शिवालिक पहाडियों के शासक ने उन्नीस वर्षों में कालिंन्जर किले का निर्माण कराया था । डी0सी0 सरकार के अनुसार गुप्त काल में चेदि राज्य की राजधानी कालिन्जर ही थी । कल्यान के कलचुरी शासक गर्व पूर्वक अपने अभिलेखों में कालिंन्जर पुराधीश्वर पद का उल्लेख करते है । जो सर्वोत्तम नगरी थी । एक जनश्रुति के अनुसार चन्देल वंश के जन्मदाता चन्द्रवर्मन ने भी कालिंन्जर में निर्माण कार्य कराया था । यह सैन्य केन्द्र पक्के लोहे की तलवार बनाने हेतु प्रसिद्द था । ऐतिहासिक ग्रन्थ ‘ताज उल मासिर’ के लेखक हसन निजामी के अनुसार कालिंन्जर की दीवारें विश्व के सुदृढ़तम दुर्ग सिकन्दरिया से अधिक सुदृढ थीं । चन्देल शासक विद्याधर के समय 1022 ई0 में गजनी आक्रमण कारी महमूह गजनवी ने कालिंन्जर का घेरा डाला था किन्तु इसकी मजबूती के कारण उसे समझौता करके वापस जाना पड़ा । 1190 ई0 में कन्नौज के गहडंवाल शासक जयचन्द्र ने एक वर्ष तक कालिन्जर का घेरा डाला किन्तु निराशा ही हाथ लगी । मुगल बादशाह हुमायूँ ने कालिन्जर में 2 माँह तक घेरा डाला । इसकी तलहटी में एक मस्जिद बनायी । 1545 ई0 में राजा कीरथ सिंह के समय अफगान शासक शेरशाह सूरी ने भी कालिन्जर का घेरा डाला था । उसके द्वारा तोप खाना ऊपर चढाया गया । यहीं पर तोप फटने से जी0टी0 रोड बनवाने वाले शेरशाह सूरी की मृत्यू हुई थी । राजा कीरत सिंह भी मारा गया था । शेरशाह के पुत्र इस्लाम शाह ने अपने दामाद अली खाँ को यहाँ का किलेदार बना दिया था । अबुल फजल की ‘आइन-ए-अकबरी’ के अनुसार मुगल बाद शाह अकबर काल में इलाहाबाद के सूबेदार ने कालिन्जर किला बघेलों से प्राप्त कर मजनूँ खाँ काकसाल को 1569 में सौंप दिया । इनके मंत्री बीरबल की यहाँ ससुराल थी । वे भी किलेदार रहे । इस समय यह हीरे व हाथी व्यापार के लिए प्रसिद्ध था । 1738 में राजा जगतराज ने बाँदा मराठों को चौथ स्वरूप दिया था ।
कालिंन्जर का नीलकंठ मंदिर और नील सरोवर, भगवान शिव द्वारा समुद्र मंथन के विष पान घटना से जुड़े हुए हैं । नीलकंठ मंदिर के निकट स्वर्गरोहण कुण्ड के दाहिने ओर 32 फीट ऊची शिव पुत्र भैरव की अद्वितीय मूर्ति है ।
चन्देल राजा परमाल ने सात खण्ड का परमाल बैठका बनवाया था जो खगोल शास्त्र के नक्षत्रीय गणना हेतु प्रयोग किया जाता था । 1857 ई0 में कालिन्जर किला अँग्रेजों के अधीन रहा । यहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णमा को होने वाले “कालिन्जर महोत्सव” का विशेष महत्व है ।
जिसमें विभिन्न प्रकार के स्थानीय नृत्य, गान एवं हस्तकौशल का आकर्षक ढंग से प्रस्तुतीकरण होता है । माननीय जिलाधिकारी द्वारा कालिन्जर के विकास एवं सुन्दरी करण हेतु दिसम्बर 2018 में “कालिन्जर फोर्ट विकास समिति” का गठन कर उसकी विशेष कार्य योजना निर्धारित कर दी गयी है ।
सड़क, सुरक्षा, परिवहन, विद्युत, पेयजल, वृक्षारोपण, ठहरने एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वच्छता, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं । 27 जुलाई 2019 को कालिन्जर में “वन मेला” लगाया गया और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कार्य हुआ । सामान्यतः पर्यटक प्रसिद्द स्थानों ऐतिहासिक इमारतों और सुरम्य पर्यावरण को देखने आते हैं ।और उनकी ये भी इच्छा होती है कि नजदीक की और भी चीजे देख ली जायें, पता नही पुनः आने का मौका मिले या न मिले । कालिन्जर किले के पास में ही सगरा बाँध का सुन्दरीकरण कर विकास किया जा रहा है । अब कार्तिक पूर्णमा को होने वाले कालिन्जर महोत्सव हेतु जोर शोर से तैयारियाँ चल रहीं हैं । विभिन्न समितियो के प्रभारी अपने-2 कार्यों में सक्रिय हैं । यहा पर ज्वाय राइडिंग, मोटर राइडिंग, बैलून उत्सव की व्यवस्था होगी ।
नवाब टैंक का आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में विकास -
माननीय जिलाधिकारी जी द्वारा कालिन्जर के साथ-साथ नवाब टैंक को भी बाँदा के आकर्षक पर्यटन के रूप में विकसित करने हेतु दृढ संकल्प लिया गया है । जल भण्डार का सौन्दर्य मन को मोहित कर देने वाला होता है । बड़े स्तर पर स्वच्छ जल देखकर आँखों को ठंडक मिलती है, शरीर की थकान मिटती है और मन को सुकून एवं शान्ति मिलती है । नवाब टैंक बाँदा शहर के दक्षिण में लगभग 3 कि0मी0 दूर बाँदा से नरैनी और बाँदा से अतर्रा रोड के बीच में लड़ाका पुरवा में स्थित है । इसे बाँदा के नवाब ने बनवाया था । वह अपनी पत्नी के साथ यहाँ पर कजली मेला का आनन्द लेता था । नवाब टैंक के सामने वन विहार पार्क स्थित है । यह क्षेत्र सुन्दर और आनन्दायक है । यही पर फ्लोरा नर्सरी से विभिन्न पौधें एवं फूल खरीदे जा सकते हैं । दिनाँक 05 अक्टूबर 2018 को जिलाधिकारी श्री हीरा लाल जी द्वारा नवाब टैंक का निरीक्षण किया गया और अपार संभावनाओं को महसूस करते हुए नवाब टैंक को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु विभिन्न समितियों का निर्माण कर दिया । पेड़ पौधें, फूल, नवाब टैंक के रेलिंग की मरम्मत एवं पुताई, जानवरों का वहाँ प्रवेश रोकना, पैडल बोट, फौव्वारा, बैठने हेतु बेंच, फूड स्टाल, शुलभ शौचालय, कम से कम तीन ए0टी0म0, गमले, विशेष प्रकार की मछलियाँ, स्वच्छता, सोलर लाईट, पेय जल, भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था, ब्च्चों के मनोरंजन के साधन, खेल कूद का सामान, झूले आदि वाहन पार्किंग, सुरक्षा एवं एक आकर्षक गेट लगवाकर स्लोगन हो “नवाब टैंक आपका स्वागत करता है” आदि व्यवस्थाओं के द्वारा नवाब टैंक के सुन्दरीकरण की योजना है और वन चेतना पार्क को भी सजाया जाना है ।
नवाब टैंक क्षेत्र कुल 10.329 हेक्टेयर भूमि पर ऑक्सीजन पार्क विकसित करने की जिला प्रशासन की योजना हैं । जिसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ऑक्सीजन पार्क नाम रखे जाने का प्रस्ताव है । और इनके जन्म दिन 31 अक्टूबर को यहाँ पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाना है । जिससे इसका प्रचार-प्रसार दूर -2 तक हो सके । पार्क में फलदार वृक्ष जैसे अमरूद, ऑवला और छायादार वृक्ष जैसे नीम, पीपल, कदम, बरगद आदि लगेंगे ।
नवाब टैंक
माननीय जिलाधिकारी द्वारा इसको भी पर्यटन विकास हेतु चिन्हाँकित किया गया है । उनकी प्रेरणा एवं निर्देशन से प्रत्येक मंगलवार की शायं केन नदी घाट में सन्ध्या आरती का आयोजन ठीक उसी स्वरूप एवं तर्ज पर किया जाता है जैसे चित्रकूट के राम घाट में मंदाकिनी नदी तट पर और बनारस के विभिन्न घाटों में गंगा आरती का आयोजन किया जाता है । आरती का यह दृश्य बहुत ही मनोरम और मन तथा हृदय को आध्यात्मिक शान्ति और ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है । यह दृश्य जल संरक्षण का भी सन्देश प्रसारित करता है । तथा जल के प्रति जन मानस में आस्था बढाता है और जल का दुर्पयोग करने से रोकता है । विश्व के अनेक देशों से आये पर्यटक इन सुनहरे पलो का बेसब्ररी से इन्तजार करते हैं। और आरती में सम्मिलित हो कर स्वयं को धन्य समझते हैं ।
केन नदी घाट
भारत में आने वाले अधिकांश पर्यटकों का यह सपना होता है कि वे नदी आरती का हिस्सा जरूर बने । समाज के विभिन्न धनी लोग जो यश और सम्मान पाने की चाहत रखते हैं । स्वयं पूजा थाल लेकर आरती करना चाहते हैं । वे कमेटी को दान देकर स्थल एवं प्रथा को सुन्दर बनाने एवं प्रचार-प्रसार करने में सहयोग करते हैं । किसी भी क्षेत्र में पर्यटक स्थल विकसित होने से उस क्षेत्र का सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विकास स्वयं ही होने लगता है । रोजगार के अवसर बढने लगते हैं । विश्व के प्रमुख पर्यटक स्थलों कोलोजियम (रोम) जिनमें निर्माण कला एवं सन्तुलन अदभुत है , रंगीन झरनों तथा रंगीन चट्टानों के लिए प्रसिद्ध यलोस्टोन ग्रांड कनयान, स्टैचू आफ लिबर्टी के लिए प्रसिद्द न्यूयार्क शहर जिसे कहते हैं कि वह कभी नही सोता, राष्टीय पार्क और हार्स राईडिंग के लिए प्रसिद्ध कोस्टारिका, शानदार आर्कीटेक्चर के लिए प्रसिद्ध अंगकोरवाट(कम्बोडिया), पुरातत्व हेतु प्रसिद्ध पेरू का माचू पिचू, मरीन ड्राईव और गेट वे आफ इण्डिया के लिए प्रसिद्ध मुम्बई, कोलकाता का विक्टोरिया महल । लाल किला, कुतुबमीनार, लोटस टेम्पल, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन के लिए प्रसिद्ध दिल्ली । एफिल टावर के लिए प्रसिद्ध प्रकाश का शहर पेरिस आदि में जाने के लिए पर्यटक सदैव आतुर रहते हैं । ऐसे ही इन्ही कडियों में कालिन्जर किला , नवाब टैंक , केन नदी घाट आदि के लिए बाँदा का नाम भी जुड सकता है । एक सर्वे के अनुसार वर्ष 2019 में नवीन पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध हुई गुजरात की स्टैचू ऑफ यूनिटी ने, सात अजूबो में से एक आगरा के प्रसिद्ध ताजमहल से अधिक धन अर्जित किया है । इस प्रकार यदि बाँदा को विश्व पर्यटन मानचित्र में स्थान मिल जाये तो बाँदा की ख्याति फैलेगी और आर्थिक प्रगति भी होगी ।
बाँदा जिला, माननीय जिलाधिकारी श्री हीरा लाल जी का सदैव आभारी रहेगा ।
निष्कर्ष –
पर्यटन में उस स्थान की ऐतिहासिकता, संस्कृति, खान-पान, रीति-रिवाज, मनोरंजन, ज्ञान, मौज-मस्ती सभी का महत्व होता है । बाँदा जनपद की धरती रत्नगर्भा है । साहित्य, कला और संस्कृति के साधक तथा वीरों से यह भूमि सदैव महिमावान रही है । बुन्देली नाँच राई, दिवारी, रॉवला, डिमरिया आदि देखकर मन का रोम-रोम प्रफुल्लित हो जाता है । वास्तव में कालिन्जर , नवाब टैंक, केन नदी घाट आदि पर्यटक स्थल बाँदा को वैश्विक पहचान दिलाने में सक्षम है । यदि ऐसे ही जिलाधिकारी जी के नेतृत्व में जिला प्रशासन बाँदा वैभव की बगिया सजाता रहा तो बाँदा जरूर विश्व में अपनी विशेष पहचान बनायेगा ।
सन्दर्भ सूत्र –
1. कु0 वंदिता श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, कालिन्जर फोर्ट विकास समिति, उपजिलाधिकारी नरैनी ।
2. श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय, नोडल अधिकारी नवाब टैंक, टूरिज्म, अधिशाषी अभियंता केन कैनाल, बाँदा ।
3. प्रो0 देवाशीष दास गुप्ता, आई0 आई0 एम0 लखनऊ, कान्सल्टैन्ट बाँदा टूरिज्म ।
4. ‘बाँदा वैभव’ द्वारा डॉ0 रमेशचन्द्र, नारायन प्रकाशन, बाँदा 1994 ।
5. ‘भारत में पर्यटन’ द्वारा ‘मंगतराम धस्माना, अनुराग प्रकाशन नई दिल्ली ।
6. भारत में पर्यटन विकास’ द्वारा डॉ0 संजय कांत भारद्वाज, हेमन्त पब्लिशिंग हाऊस, दिल्ली 2013 ।
7. ‘द फोर्ट आफ बुन्देलखण्ड’ रूपा कम्पनी पब्लिकेशन 2017 द्वारा रीता शर्मा एण्ड विजयी शर्मा ।
Received on 21.11.2020 Modified on 16.12.2020
Accepted on 31.12.2020 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):219-222.